UPSC Hindi Literature Optional Paper 2014 (हिंदी साहित्य प्रश्न पत्र)

UPSC Hindi Literature Optional Paper-1 2014: हिंदी साहित्य प्रथम प्रश्न पत्र

खण्ड ‘A’

1. निम्नलिखित प्रत्येक पर लगभग 150 शब्दों में टिप्पणियाँ लिखिए।

(a) अपभ्रंश और अवहट्ट का पारस्परिक सम्बन्ध
(b) देवनागरी लिपि की विशेषताएं
(c) अवधी की व्याकरणिक विशेषताएं
(d) खुसरो की काव्य-भाषा
(e) रहीम की कविता की मार्मिकता के प्रमुख कारण

2. (a) हिन्दी व्याकरण के संदर्भ में किशोरीदास वाजपेयी के योगदान का आकलन कीजिए।
(b) सन्त -साहित्य के महत्व पर प्रकाश डालिए।
(c) दक्खिनी हिन्दी के स्वरूप का परिचय दीजिए।

3. (a) राजभाषा हिन्दी के विकास और उन्नति में आने वाली बाधाओं का वर्णन कीजिए।
(b) “हिन्दी दिवस (14 सितम्बर) मात्र एक कर्मकाण्ड बनकर रह गया है।” इस कथन का तार्किक उत्तर दीजिए।
(c) ‘हिन्दुस्तानी’ का परिचय दीजिए।

4. (a) “हिन्दी में वैज्ञानिक लेखन की स्थिति असंतोषजनक है।” इस कथन का परीक्षण कीजिए।
(b) हिन्दी की समृद्धि में उसकी बोलियों के योगदान का आकलन कीजिए।
(c) कामताप्रसाद गुरु की वैयाकरण के रूप में की गयी स्थापनाओं का मूल्यांकन कीजिए।

खण्ड ‘B’

5. निम्नलिखित पर लगभग 150 शब्दों में टिप्पणियाँ लिखिए :

(a)घनानन्द की काव्यगत विशेषताएं
(b) ‘जयशंकर प्रसाद’ की सौंदर्य-चेतना
(c) ‘झूठा-सच’ के आधार पर यशपाल की जीवन-दृष्टि
(d) जगदीश चन्द्र माथुर का नाट्य-शिल्प
(e) भारतेन्दु की राष्ट्रीय चेतना

6. (a) पद्माकर की काव्य-कला पर प्रकाश डालिए।
(b) भक्तिकालीन काव्य की प्रासंगिकता पर विचार कीजिए।
(c) ‘अज्ञेय’ की काव्य-भाषा पर एक संक्षिप्त लेख लिखिए।

7. (a) “‘गोदान’ तक आते-आते प्रेमचंद का आदर्शवाद से पूरी तरह मोहभंग हो जाता है।” इस कथन का परीक्षण कीजिए।
(b) रेणु के उपन्यासों के आधार पर उनकी विचारधारा पर प्रकाश डालिए।
(c) ‘आधे अधूरे’ के महत्व पर प्रकाश डालिए।

8. (a) “वामपंथी लेखकों की रामविलास शर्मा ने निष्पक्ष समीक्षा नहीं की है।” इस कथन का परीक्षण कीजिए।
(b) महादेवी के रेखाचित्रों की विशेषताएं लिखिए।
(c) हिन्दी के प्रमुख यात्रा-वृत्तांतों का संक्षिप्त परिचय दीजिए।


UPSC Hindi Literature Optional Paper-2 2014: हिंदी साहित्य द्वितीय प्रश्न पत्र

खण्ड ‘A’

1. निम्नलिखित काव्यांशों की संदर्भ-सहित व्याख्या (लगभग 150 शब्दों में) प्रस्तुत करते हुए उनके काव्य-सौंदर्य का परिचय दीजिए:

(a) संदेसनि मधुबन-कूप भरे।
जो कोउ पथिक गए हैं ह्याँ ते फिरि नहिं अवन करे।।
कै वै स्याम सिखाय समोधे कै वै बीच मरे?
अपने नहिं पठवत नंदनंदन हमरेउ फेरि धरे।।
मसि खूँटी कागद जल भीजे, सर दव लागि जरे।
पाती लिखै कहो क्यों करि जो पलक-कपाट अरे ?

(b) अवगुन एक मोर मै माना ।
बिछुरत प्रान न कीन्ह पयाना।।
नाथ सो नयनन्ही को अपराधा ।
निसरत प्रान करहिं हठि बाधा ।।
बिरह आगिनि तनु तूल समीरा।
स्वास जरइ छन माहिं सरीरा।।
नयन स्रवहिं जलु निज हित लागी ।
जरैं न पाव देह बिरहगी।।

(c) शांति-बीन तब तक बजती है
नहीं सुनिश्चित सूर में,
स्वर की शुद्ध प्रतिध्वनि जब तक
उठे नहीं उर-उर में।
यह न बाह्य उपकरण,भार बन
जो आवे ऊपर से,
आत्मा की यह ज्योति, फूटती
सदा बिमल अंतर से।।

(d) “विषमता की पीड़ा से व्यस्त हो रहा
स्पंदित विश्व महान,
यही दुख-सुख, विकास का सत्य यही
भूमा का मधुमय दान।
नित्य समरसता का अधिकार उपड़ता
कारण-जलधि समान,
व्यथा से नीली लहरों बीच बिखरते
सुख-मणिगण द्युतिमान ।।”

(e) “श्रेय नहीं कुछ मेरा:
मैं तो डूब गया था स्वयं शून्य में-
वीणा के माध्यम से अपने को मैंने
सब-कुछ को सौंप दिया था-
सुना आपने जो वह मेरा नहीं,
न वीणा का था :
वह तो सब-कुछ की तथता थी
महाशून्य
वह महामौन
अविभाज्य, अनाप्त, अद्रवित, अप्रमेय
जो शब्दहीन
सब में गाता है।”

2. (a) क्या कबीर ने अनिश्वरत्व के निकट पहुँच चुके भारतीय जनमानस को निर्गुण ब्रह्म की भक्ति की ओर प्रवृत्त होने की उत्तेजना प्रदान की? तर्क सम्मत उत्तर दीजिए।
(b) ठेठ अवधी भाषा के माधुर्य और भावों की गंभीरता की दृष्टि से ‘पद्मावत’ महाकाव्य निराला है। विवेचन कीजिए।
(c) बिहारी की कविता के साक्ष्य से बताइए कि कवि की धर्म और दर्शन के क्षेत्रों में पैठ थी।

3. (a) सोदाहरण स्पष्ट कीजिए कि सूर ने योगमार्ग को संकीर्ण, कठिन और नीरस तथा भक्तिमार्ग को विशाल,सरल और सरस क्यों कहा है?
(b) “बुद्धिवाद के विकास में, अधिक सुख की खोज में, दुख मिलना स्वाभाविक है।” ‘कामायनी’ के आधार पर इस कथन की समीक्षा कीजिए।
(c) क्या आप समझते हैं कि ‘भारत-भारती ‘ में व्यक्त कवि के कतिपय विचार पुराने पद गए हैं और उनसे सहमत होना कठिन हैं। इस संदर्भ में ‘भारत भारती’ की प्रासंगिकता पर विचार कीजिए।

4. (a) सोदाहरण विवेचित कीजिए कि ‘राम की शक्तिपूजा’ के बाद निराला की रचनाओं में आकांक्षा-पूर्ति के स्वप्न क्रमशः कम होते गए है।
(b) नागार्जुन की कविता लोक-जीवन की भूमि से उग कर, प्रतिबद्धता पर आरूढ़ हो, व्यंग्य के शिखर का स्पर्श करती है। – इस कथन की पुष्टि कीजिए।
(c) दिनकर की काव्य भाषा की उन विशेषताओं पर उदाहरण-सहित विचार कीजिए जो उन्हें लोकप्रिय बनाती हैं।

खण्ड ‘B’

5. निम्नलिखित गद्यांशों की (लगभग 150 शब्दों में) ससन्दर्भ व्याख्या करते हुए उनके रचनात्मक-सौंदर्य को उद्घाटित कीजिए:

(a) यह मेरे अभाव की संतान है। जो भाव तुम थे, वह दूसरा नहीं हो सका, परंतु अभाव के कोष्ठ में किसी दूसरे की जाने कितनी-कितनी आकृतियाँ हैं। जानते हो मैंने अपना नाम खोकर एक विशेषण उपार्जित किया है और अब मैं अपनी दृष्टि में नाम नहीं, केवल विशेषण हूँ?
(b) बुद्धि की क्रिया से हमारा ज्ञान जिस अद्वैत भूमि पर पहुंचता है, उसी भूमि तक हमारा भावात्मक हृदय भी इस सत्व-रस के प्रभाव से पहुंचता है। इस प्रकार अंत में जाकर दोनों पक्षों की वृत्तियों का समन्वय हो जाता है। इस समन्वय के बिना मनुष्यत्व की साधना पूरी नहीं हो सकती।
(c) जो कुछ अपने से नहीं बन पड़ा, उसी के दुख का नाम मोह है। पाले हुए कर्तव्य और निपटाए हुए कामों का क्या मोह ! मोह तो उन अनाथों को छोड़ जाने में है, जिनके साथ हम अपना कर्तव्य न निभा सके; उन अधूरे मंसूबों में है, जिन्हे हम पूरा न कर सके।
(d) काष्ट हृदय की कसौटी है- तपस्या अग्नि है- सम्राट ! यदि इतना भी न कर सके तो क्या ! सब क्षणिक सुखों का अंत है। जिसमें सुखों का अंत न हो, इसलिए सुख करना ही न चाहिए। मेरे इस जीवन के देवता और उस जीवन के प्राप्य ! क्षमा !।
(e) “विद्यापति कवि के गान कहाँ?” बहुत दिनों बाद मन में उलझे हुए उस प्रश्न का जवाब दिया – जिंदगी-भर बेगारी खटने वाले, अनपढ़ गँवार और अर्धनग्ननों में, कवि ! तुम्हारे विद्यापति के गान हमारी टूटी झोपड़ियों में जिंदगी के मधुरस बरसा रहे हैं। – ओ कवि ! तुम्हारी कविता ने मचल कर एक दिन कहा था- चलो कवि, बनफूलों की ओर !

6. (a) द्विवेदियुगीन निबंधों में भाषा-संस्कार, रुचि-परिमार्जन, वैचारिक परिपक्वता और विषय-विवधता के कारण आए परिवर्तनों को उदाहरणों सहित रेखांकित कीजिए।
(b) हजारीप्रसाद द्विवेदी के ललित निबंधों में वैचारिकता किस भाँति अनुस्यूत रहती है? इस संबंध में युक्तियुक्त उत्तर दीजिए।
(c) बालकृष्ण भट्ट और गुलाब राय के निबंधों की भाषा-शैली की विशेषताओं पर तुलनात्मक दृष्टि से विचार कीजिए।

7. (a) क्या ‘स्कंदगुप्त’ नाटक में कल्पना और इतिहास के समन्वय से नाटक के संप्रेषणगत सौंदर्य में वृद्धि हुई है? तर्कयुक्त उत्तर कीजिए।
(b) इस बात पर सम्यक रूप से विचार कीजिए कि नई कहानी की यात्रा अनुभव से स्वयं गुजरने की यात्रा है।
(c) यदि आपको प्रेमचंद की सभी कहानियों में से केवल एक ही सर्वोत्तम कहानी चुननी हो तो आप कौन-सी चुनेंगे और क्यों ?

8. (a) यदि प्रेमचन्द ‘गोदान’ को उपन्यास के बदले नाटक के रूप में लिखते, तो आपकी दृष्टि में वे उसमें क्या छोड़ते और क्या जोड़ते ?
(b) “यसमें फूल भी हैं शूल भी, धूल भी है, गुलाब भी, कीचड़ भी है, चंदन भी, सुंदरता भी है, कुरूपता भी – मैं किसी से दामन बचाकर नहीं निकल पाया।” – रेणु के इस कथन के आलोक में ‘मैला आँचल’ का मूल्यांकन कीजिए।
(c) “‘महाभोज’ उपन्यास में हमारे वर्तमान समाज और राजनीति का नकारात्मक यथार्थ-वर्णन तो विश्वसनीय बन पड़ा है, लेकिन सकारात्मक पहलू हवाई आदर्श बन गया है” – इस टिप्पणी के संदर्भ में आप अपना तर्कपूर्ण पक्ष प्रस्तुत कीजिए।


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