UPSC Anthropology Optional Question Paper 2025: प्रश्न पत्र I
खण्ड ‘A’
1. निम्नलिखित प्रत्येक पर लगभग 150 शब्दों में टिप्पणी लिखिए : (10×5=50)
(a) मेंडेलीय तथा गैर-मेंडेलीय तत्त्व।
(b) पुरुम नातेदारी प्रणाली का सैद्धान्तिक महत्व।
(c) अस्थिदन्तशृंग संस्कृति और इसके निर्माता।
(d) गैर-मानव प्राइमेट्स में संकेतक रूप में गंध।
(e) संस्कृति तथा अवतारण।
2. (a) उद्विकास में मध्य नूतन कालीन होमिनॉइड अवशेषों तथा उनके महत्व की विवेचना कीजिए। (20)
(b) संस्कृति को समझने में क्लिफोर्ड गीर्ट्ज तथा विक्टर टर्नर के प्रतीकात्मक दृष्टिकोणों की तुलना तथा भेद स्पष्ट कीजिए। (15)
(c) जैव-सांस्कृतिक नृविज्ञान में राजनीतिक अर्थव्यवस्था को पारिस्थितिकी एवं अनुकूलनशीलता से कैसे एकीकृत किया जाता है? (15)
3. (a) मानवशास्त्री किसी समुदाय की पोषण स्थिति का मूल्यांकन कैसे करते हैं? पोषण मानव विज्ञान के अध्ययन में पारिस्थितिकी, संस्कृति तथा सामाजिक असमानता की प्रतिच्छेदनीयता के महत्व की विवेचना कीजिए। (20)
(b) समकालीन समाज को समझने में संस्कृति को एक ‘एकीकृत-बंद’ प्रणाली के रूप में मानने की कमियों की समालोचनात्मक जांच कीजिए। (15)
(c) पेडिग्री तथा जीनिआलॉजी विश्लेषणों के बीच अन्तर स्पष्ट कीजिए। इनके इतिहास तथा मानवशास्त्रीय अध्ययनों में इनकी उपयोगिता की विवेचना कीजिए। (15)
4. (a) विज्ञान तथा मानविकी की बीच की दूरी को पाटकर मानवविज्ञान मानव अध्ययन को बहुआयामी समझ प्रदान करता है। स्पष्ट कीजिए। (20)
(b) मुस्तारी औजार परम्परा, मुस्तारी संस्कृति तथा इसके निर्माताओं पर टिप्पणी लिखिए। (15)
(c) जेम्स फ्रेजर के उद्विकास के सिद्धान्त का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। आधुनिकता में धर्म के स्थान को स्पष्ट कीजिए। (15)
खण्ड ‘B’
5. निम्नलिखित प्रत्येक पर लगभग 150 शब्दों में टिप्पणी लिखिए : (10×5=50)
(a) बहुजातीय, बहुस्थानीय तथा आलोचनात्मक नृजाति वर्णन।
(b) रजोनिवृत्ति का उद्विकासीय महत्व।
(c) विखंडन ट्रैक काल निर्धारण प्रविधि एवं इसकी उपयोगिता।
(d) सूत्रकणिकीय डीएनए तथा मानव उद्विकास।
(e) वयस्क रोगों की भ्रूण उत्पत्ति तथा डेविड बार्कर का योगदान।
6. (a) आनुवंशिक मार्कर क्या होते हैं? जनसंख्या भिन्नता, रोग संबंध और फॉरेंसिक्स को समझने में उनके अनुप्रयोग पर चर्चा कीजिए। (20)
(b) “बीसवीं सदी के मध्य से शारीरिक मानव विज्ञान की कार्यसूची अधिक वैज्ञानिक बन गयी।” पुष्टि कीजिए। (15)
(c) संस्कृति, भाषा तथा विचारों के संबंधों को समझने के लिए भाषाई मानवविज्ञान के सैद्धान्तिक दृष्टिकोणों का संक्षेप में वर्णन कीजिए। (15)
7. (a) विवाह के रूपों में भिन्नता के अध्ययन ने सामाजिक प्रजनन, नातेदारी तथा परिवार की अवधारणा को कैसे प्रेरित किया? (20)
(b) खाद्य उत्पादन की उत्पत्ति के समर्थन में प्रस्तुत प्रमुख सिद्धान्त क्या हैं? इस अवधि के दौरान निर्वाह अर्थव्यवस्था में परिवर्तन ने किस प्रकार क्रान्ति ला दी थी? (15)
(c) मानव उद्विकास की गाथा में अफ्रीकी महाद्वीप की केंद्रीयता की आलोचनात्मक विवेचना कीजिए। (15)
8. (a) उत्तर आधुनिकता के सिद्धान्त सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने और हाशिये पर खड़े समुदायों के सशक्तिकरण में कैसे प्रासंगिक हैं? (20)
(b) ‘जीनोम-व्यापी रोग संबंध अध्ययन (GWAS) स्वास्थ्य एवं रोगों पर हमारी समझ विकसित करते हैं।’ विवेचना कीजिए। (15)
(c) फॉरेंसिक विश्लेषण में मानव अवशेषों की उपयोगिता का परीक्षण कीजिए। चेहरा पुनर्निर्माण तकनीकी की विवेचना कीजिए। (15)
UPSC Anthropology Optional Question Paper 2025: प्रश्न पत्र II
खण्ड – A
1. निम्नलिखित में से प्रत्येक पर लगभग 150 शब्दों में लघु टिप्पणी लिखिए : (10×5=50)
(a) ‘सोअन संस्कृति’ परम्परा
(b) जातिगत वर्चस्व, गुटबंदी एवं राजनीतिक शक्ति
(c) क्षेत्रवाद तथा स्वायत्तता
(d) अरुणाचल प्रदेश के संदर्भ में वेरियर एल्विन का दर्शन
(e) लघु तथा बृहत् परम्पराओं के लक्षण एवं उनके बीच संचार
2. (a) भारत में शिवालिकों के पुरामानवशास्त्रीय महत्व की इसके विभाजनों, प्राइमेट जीवाश्म प्राणिजातों तथा प्रमुख प्राइमेट जीवाश्म स्थलों सहित विवेचना कीजिए। (20)
(b) एस. एस. सरकार द्वारा किए गए भारतीय जनसमूहों के वर्गीकरण के प्रमुख लक्षणों का निरूपण कीजिए। क्या उनका वर्गीकरण रिजले से बेहतर था? स्पष्ट कीजिए। (15)
(c) उत्तर-पूर्व भारत की अनुसूचित जनजातियों पर ईसाई धर्म के प्रभाव का मूल्यांकन कीजिए। (15)
3. (a) भारत में उच्च पुरापाषाण के विशिष्ट लक्षणों एवं विस्तार का वर्णन कीजिए। (20)
(b) भारतीय जनजातियों के स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले पर्यावरणीय एवं जैव-सांस्कृतिक कारकों का परीक्षण कीजिए। (15)
(c) भारतीय मानवविज्ञान में बी. एस. गुहा, इरावती कर्वे तथा एस. आर. के. चोपड़ा के महत्वपूर्ण योगदान पर प्रकाश डालिए। (15)
4. (a) भारत में विभिन्न प्रकार की जाति गतिशीलताएँ क्या हैं? इनके उत्तरदायी विभिन्न कारकों पर प्रकाश डालिए। (20)
(b) भारत की जनसंख्या वृद्धि में जनसांख्यिकीय तथा सामाजिक कारकों की भूमिका स्पष्ट कीजिए। (15)
(c) अनुसूचित जनजाति (एस. टी.) की अवधारणा का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए तथा प्रशासकों द्वारा निर्दिष्ट मानकों की सीमाओं का उल्लेख कीजिए। (15)
खण्ड – B
5. निम्नलिखित में से प्रत्येक पर लगभग 150 शब्दों में लघु टिप्पणी लिखिए : (10×5=50)
(a) भारत के जनजातीय समुदायों पर शहरीकरण तथा औद्योगीकरण के प्रभाव
(b) रामापिथेकस–शिवापिथेकस विवाद की रोशनी में रामापिथेकस की वर्गिकी प्रस्थिति
(c) जनजातिवाद तथा छद्म-जनजातिवाद
(d) वर्णाश्रम एवं इसका समकालीन औचित्य
(e) लोथल गोदीबाड़ा तथा अंतर्राष्ट्रीय व्यापारिक संबंध
6. (a) “गाँव मात्र ऐसा स्थान नहीं था जहाँ लोग रहते थे; यह ऐसा अभिकल्प था जहाँ भारतीय सभ्यता के आधारभूत मूल्य प्रतिबिंबित होते थे।” यह कथन किसका था? इस कथन की विस्तारपूर्वक व्याख्या कीजिए। (20)
(b) कमजोर वर्गों के सामाजिक-आर्थिक एवं राजनीतिक विकास में गैर-सरकारी संगठनों की भूमिका तथा अन्य हितधारकों को सुसाध्य बनाने के तरीकों की विवेचना कीजिए। (15)
(c) अन्य पिछड़े वर्गों की सूची बनाने की प्रविधियों तथा इसके इतिहास के अनुसरण का राज्य तथा राष्ट्र के स्तर पर वर्णन कीजिए। (15)
7. (a) जनजातीय विकास की प्रक्रिया में समकालीन सीमाओं की पहचान कीजिए। इस प्रक्रिया में मानवशास्त्रीय ज्ञान का योगदान कैसे हो सकता है? (20)
(b) भारत में बढ़ते हुए नृजातीय संघर्षों की विवेचना कीजिए तथा इनके संभावित उपचारों को प्रस्तावित कीजिए। (15)
(c) राष्ट्र-राज्य की अवधारणा का समालोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए तथा देशज समाजों पर इसके प्रभाव का वर्णन कीजिए। (15)
8. (a) नीलगिरि पर्वतों की टोडा, कोटा, कुरुम्बा तथा इरुला जनजातियों की परम्परागत सामाजिक-आर्थिक परस्पर निर्भरता की प्रकृति का विवरण प्रस्तुत कीजिए। इन अन्तर्सम्बन्धों में आए परिवर्तनों पर प्रकाश डालिए। (20)
(b) अल्पसंख्यक की परिभाषा दीजिए। भारत में अल्पसंख्यकों के भाषाई तथा धार्मिक प्रतिमानों की विस्तारपूर्वक व्याख्या कीजिए। (15)
(c) भारत में पी. वी. टी. जी. की पहचान के क्या आधार हैं? उनकी वर्तमान प्रस्थिति, नामावली तथा विस्तार का परीक्षण कीजिए। (15)
