UPSC History Optional Question Paper 2025 in Hindi (इतिहास)

UPSC History Optional Question Paper 2025: प्रश्न-पत्र -I

खण्ड – A / SECTION — A

Q1.आपको दिए गए मानचित्र पर अंकित निम्नलिखित स्थानों की पहचान कीजिए एवं अपनी प्रश्न-सह-उत्तर पुस्तिका में उनमें से प्रत्येक पर लगभग 30 शब्दों की संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए । मानचित्र पर अंकित प्रत्येक स्थान के लिए स्थान निर्धारण संकेत क्रमानुसार नीचे दिए गए हैं :

(i) नवपाषाणिक स्थल
(ii) मध्यपाषाणिक स्थल
(iii) पुरापाषाणिक स्थल
(iv) प्रस्तर कलाकृति युक्त नवपाषाणिक स्थल
(v) सिंधु घाटी सभ्यता स्थल
(vi) अग्निकुण्ड युक्त प्रारंभिक हड़प्पीय स्थल
(vii) उत्तर हड़प्पीय स्थल
(viii) गेरुए रंग के मृद्भांड (OCP) स्थल
(ix) मध्यपाषाणिक स्थल
(x) महापाषाणिक स्थल
(xi) दक्षिण भारत का महाजनपद
(xii) बुद्ध का महापरिनिर्वाण स्थल
(xiii) अशोक का प्रमुख शिलालेख
(xiv) अशोक का लघु शिलालेख
(xv) मौर्यों का व्यापारिक केन्द्र
(xvi) शक-कुषाण सिक्कों का ज़ख़ीरा
(xvii) अश्वमेघ यज्ञ वर्णित एक अभिलेख
(xviii) मौर्योत्तर कालीन पकी ईंटों का गृह स्थल
(xix) मौर्योत्तर कालीन टेराकोटा शिल्प केन्द्र
(xx) पल्लवकालीन महत्त्वपूर्ण बंदरगाह

Q2. (a) “ताम्रपाषाणिक संस्कृति के लोग लघुपाषाणिक उपकरण में विशेषज्ञ थे और साथ ही प्रस्तर कार्य के कुशल कारीगर भी थे।” स्पष्ट कीजिए ।
(b) “हड़प्पावासी कलाप्रेमी लोग नहीं थे । ” टिप्पणी कीजिए ।
(c) “जैन धर्म एवं बौद्ध धर्म द्वारा प्रस्तुत वैचारिक चुनौती की जड़ें पूर्वी भारत में कृषि-आधारित बस्तियों के विस्तार से उत्पन्न सामाजिक-आर्थिक परिवर्तनों में निहित थीं । ” व्याख्या कीजिए ।

Q3. (a) “प्रादेशिक गणराज्यों की उत्पत्ति उत्तर वैदिक काल में विकसित जीवन पद्धति के विरुद्ध प्रतिक्रिया में देखी गई है।” विश्लेषण कीजिए ।
(b) मौर्यों ने भौतिक संस्कृति का प्रसार गंगा के मैदानों में कहाँ तक सुगम कर दिया ? व्याख्या कीजिए ।
(c) प्रथम से तृतीय शताब्दी ईसवी के दौरान भारत के मध्य एशिया से संपर्कों की प्रकृति एवं प्रभाव परीक्षण कीजिए। इन संपर्कों ने भारत के राजनीतिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक क्षेत्रों को किस प्रकार से प्रभावित किया ?

Q4. (a) “पूर्व मध्यकालीन भारत में सामाजिक गतिशीलता की प्रक्रिया जातिगत पदानुक्रम, धार्मिक वैधता, आर्थिक परिवर्तन और राजनीतिक संरक्षण में जटिल अंतःक्रिया से प्रभावित थी ।” आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए कि इन कारकों ने सामूहिक रूप से पूर्व मध्यकालीन भारतीय सामाजिक संरचना को कैसे पुनर्गठित किया ।
(b) उन परिस्थितियों की विवेचना कीजिए जिनके कारण पल्लवों और चालुक्यों के मध्य संघर्ष हुए और बताइए कि इस प्रतिद्वन्द्विता ने दक्षिण भारत की सत्ता संरचना को कैसे प्रभावित किया ।
(c) पूर्व मध्यकालीन भारत में कला और साहित्य के विकास के प्रमुख चरणों का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए तथा स्पष्ट कीजिए कि किस प्रकार ये चरण उस काल के समाज एवं संरक्षण स्वरूप में व्यापक परिवर्तनों को प्रतिबिंबित करते हैं।

खण्ड – B / SECTION — B

Q5. निम्नलिखित प्रत्येक प्रश्न का उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए :

(a) “उत्तर मध्यकालीन भारत में धार्मिक विषयों ने प्रांतीय भाषाओं के साहित्य के एक बड़े अनुभाग को प्रेरित किया ।” टिप्पणी कीजिए ।
(b) “अलाउद्दीन खिलजी के आर्थिक उपायों का लक्ष्य दिल्ली सल्तनत में राजनीतिक सत्ता का केंद्रीकरण था ।” स्पष्ट कीजिए ।
(c) मुगल भारत में शाही कारखानों की भूमिका का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए। वे मुगल राज्य की वैचारिक और कार्यात्मक अनिवार्यताओं को किस प्रकार प्रतिबिंबित करते हैं ?
(d) “सिख धर्म के सिद्धांत इस्लामी और भारतीय (इंडिक) धार्मिक विश्वासों एवं प्रथाओं के सामंजस्यपूर्ण मिश्रण का प्रतिनिधित्व करते हैं ।” टिप्पणी कीजिए ।
(e) मुगल युग के दौरान बारूद ने भारत में युद्ध के चरित्र को बदल दिया । स्पष्ट कीजिए ।

Q6. (a) टोडरमल की राजस्व प्रणाली की संरचनात्मक विशेषताओं की विवेचना कीजिए और मूल्यांकन कीजिए कि भारत में किस हद तक यह प्रणाली भू-राजस्व निर्धारण में मानकीकरण लाने में सफल रही।
(b) बरनी की “फतवा-ए-जहाँदारी” दिल्ली सल्तनत का सही विवरण नहीं, अपितु एक विलाप (आक्षेप) था । स्पष्ट कीजिए ।
(c) मुगल संरक्षण में हिंदी साहित्य के विकास पर चर्चा कीजिए । भक्ति और सूफ़ी आंदोलनों ने इसे किस प्रकार से प्रभावित किया ?

Q7. (a) पुर्तगाली समुद्री शक्ति ने 16वीं सदी में हिंद महासागर में व्यापार के स्वरूप को बाधित किया। समीक्षा कीजिए ।
(b) अकबर की राजपूत नीति मुगल दरबार के गुटीय राजनीतिक विचारों द्वारा निर्मित थी । विवेचना कीजिए।
(c) उत्तर भारत की कृषि संरचना पर मुगलकालीन राजस्व प्रशासन के प्रभावों का मूल्यांकन कीजिए। इसने ग्रामीण सामाजिक-आर्थिक ताने-बाने को किस हद तक निरंतरित एवं परिवर्तित किया ?

Q8. (a) “औरंगज़ेब की धार्मिक नीति मुगल साम्राज्य की बदली हुई राजनीतिक वास्तविकताओं का प्रतिबिं थी ।” स्पष्ट कीजिए ।
(b) मुगल साम्राज्य के अन्तर्गत विशिष्ट प्रांतीय स्थापत्यगत शैलियों के उत्कर्ष को संरचनात्मक विविधता, सांस्कृतिक अंतः क्रिया और प्रांतीय सत्ता संरचनाओं की प्रकृति के प्रकाश में परिभाषित कीजिए ।
(c) 18वीं शताब्दी में मराठा राज्य के स्वरूप में परिवर्तन लाने वाले राजनीतिक, सैन्य एवं प्रशासनिक कारकों का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए । इन परिवर्तनों ने इसके उत्थान और अंतत: पतन को किस प्रकार प्रभावित किया ?


UPSC History Optional Question Paper 2024: प्रश्न-पत्र -II

खण्ड -A

1. निम्नलिखित कथनों में से प्रत्येक का लगभग 150 शब्दों में समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए :

(a) “अपने उदय की आकस्मिकता, अपनी सफलताओं की चमक तथा अपने पराभव की पूर्णता में सिख राजतन्त्र नेपोलियन की भाँति था । “
(b) “पेशवाओं के अधीन मराठा व्यवस्था में घरेलू (आन्तरिक) मतभेदों का बीजारोपण काफी घना तथा गहरा था।”
(c) ” भगत सिंह और उनके साथियों ने क्रांति के उद्देश्य और दायरे को व्यापक रूप दिया, उसे केवल राजनीतिक उथल-पुथल तक सीमित न रखकर सामाजिक और वैचारिक परिवर्तन का माध्यम बना दिया । “
(d) “ 1892 के भारतीय परिषद् अधिनियम की महत्त्वपूर्ण विशेषता चुनाव का सिद्धान्त थी जिसे इसमें पेश किया गया था, हालाँकि इसमें ‘चुनाव’ शब्द का प्रयोग बहुत सावधानी से टाला गया था । “
(e) “औपनिवेशिक शासन ने भारतीय बाजारों को इंग्लैंड – निर्मित उत्पादों के लिए खोल दिया तथा स्वदेशी हस्तशिल्प उद्योगों के ‘विउद्योगीकरण’ अथवा विनाश का मार्ग प्रशस्त कर दिया । “

2. (a) क्या आप सहमत हैं कि बंगाल में 1793 में भू-राजस्व के स्थायी निर्धारण की अवधारणा पर प्रकृतिवादी सिद्धान्त विचारधारा का गहरा प्रभाव था ? विवेचना कीजिए |
(b) ” प्रेस की स्वतन्त्रता तथा नियन्त्रण, इन दोनों सिद्धान्तों के बीच खींचतान का प्रभाव औपनिवेशिक शासकों के प्रेस के प्रति उनके रवैये में महसूस होता है।” विवेचना कीजिए ।
(c) “ भाषाई राज्यों के लिए आंदोलन ने राष्ट्रवादी अभिजातवर्ग के बीच गहरी आशंकाएँ पैदा कीं। उन्हें डर था कि इससे भारत का विघटन ( बाल्कनीकरण) हो जाएगा।” परीक्षण कीजिए ।

3. (a) “कर्नाटक युद्धों के दौरान, फ्रांसीसी स्थिति जिसने एक समय भारतीय विश्व को अपनी राजनीतिक सफलताओं से चकित कर दिया था, उसका अंत अपमान और विफलता में होना तय था।” व्याख्या कीजिए ।
(b) भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस की स्थापना से सम्बन्धित ‘सुरक्षा वाल्व सिद्धान्त’ को हाल के शोधकर्ताओं द्वारा पूरी तरह से अस्वीकृत क्यों कर दिया गया है ? विश्लेषण कीजिए ।
(c) ” गाँधी का आगमन राष्ट्रीय आंदोलन का भारतीयकरण था । ” 1917 – 1922 के मध्य हुए उनके प्रारंभिक आन्दोलनों के सन्दर्भ में विश्लेषण कीजिए ।

4. (a) “सांस्कृतिक पुनरुत्थान और आधुनिकीकरण के बीच तनाव ने 19वीं सदी के भारत में सामाजिक-धार्मिक सुधार आन्दोलनों की दिशा को आकार दिया।” विवेचना कीजिए ।
(b) 19वीं सदी के जनजातीय तथा कृषक विद्रोहों ने भारत में राष्ट्रवाद के उदय एवं विकास में किस प्रकार योगदान दिया ? परीक्षण कीजिए ।
(c) जातिगत अन्याय एवं असमानता को दूर करने के लिए 1947 के पश्चात् भारत सरकार द्वारा उठाए गए प्रमुख कदमों की विवेचना कीजिए ।

खण्ड – B / SECTION – B

5. निम्नलिखित कथनों में से प्रत्येक का लगभग 150 शब्दों में समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए :

(a) “फ्रांसीसी क्रांति की शुरुआत हुई और इसके प्रथम चरण में अभिजात (कुलीन) वर्ग को विजय प्राप्त हुई । ”
(b) “1832 के सुधार अधिनियम के साथ एक ऐसी विधायी पुनर्रचना की प्रक्रिया की शुरुआत हुई जिसकी ब्रिटिश इतिहास में कोई मिसाल नहीं मिलती।”
(c) “प्रथम विश्वयुद्ध ने केवल राजनीतिक प्रभाव ही उत्पन्न नहीं किए, इसने सोचने के तरीकों पर भी गहरा प्रभाव डाला।”
(d) “सोवियत संघ में तथा चीन में भी, यह दृढ़ विश्वास था कि उपनिवेशों में चल रहे साम्राज्य – विरोधी आन्दोलनों का परिणाम उन देशों के समाजवादी खेमे में शामिल होने के रूप में होगा । “
(e) “मार्क्स – पूर्व समाजवादी विचारकों ने समाजवादी समाजों की कल्पना, उन्हें प्राप्त करने या बनाए रखने के व्यावहारिक तन्त्र पर पूरी तरह विचार किए बिना ही की । “

6. (a) “19वीं सदी में राष्ट्रवाद एकीकरण और विघटन दोनों के लिए प्रेरक शक्ति था ।” यूरोप और दुनिया के अन्य देशों से उदाहरण देकर समझाइए ।
(b) “अमेरिकी क्रांति, कई मायनों में, राजनीतिक, नागरिक तथा धार्मिक क्षेत्रों में प्रबोधन की अभिव्यक्ति थी । ” व्याख्या कीजिए।
(c) क्या नव-साम्राज्यवाद पुराने औपनिवेशिक तरीकों की निरन्तरता था या यह वैश्विक शक्ति संरचना में एक मौलिक परिवर्तन का संकेतक था ? आलोचनात्मक विवेचना कीजिए ।

7. (a) “1932 के चुनावों तक, जर्मनी के शासक वर्गों को यह महसूस होने लगा था कि गहरे आर्थिक संकट से निकलने का एकमात्र रास्ता यह है कि राजनीतिक सत्ता को एक सर्वसत्तावादी शासन को सौंप दिया जाय । ” व्याख्या कीजिए।
(b) मिखाइल गोर्बाचेव के घरेलू सुधारों की प्रमुख विशेषताओं का आलोचनात्मक विवेचन कीजिए ।
(c) “प्रबोधन के पादरी- प्रथा विरोध में पुनर्जागरण तथा सुधारवाद की भावनाएँ प्रतिध्वनित हुईं। फिर भी इसने न पुनर्जागरण के विधर्मवाद ( पैगनवाद) का समर्थन किया और न ही सुधारवाद के विश्वास को साझा किया । ” विवेचना कीजिए।

8. (a) वियतनाम के गैर-साम्यवादी नेता, हिन्द- चीन के उपनिवेशवाद – विरोधी संघर्ष को सफल नेतृत्व प्रदान करने में क्यों असफल रहे? विवेचना कीजिए ।
(b) यूरोपीय आर्थिक समुदाय के मुक्त व्यापार की अवधारणा ने किस हद तक यूरोपीय संघ के निर्माण में योगदान दिया ? परीक्षण कीजिए ।
(c) 20वीं सदी के प्रारम्भ में जर्मन समाज पर वैज्ञानिक शिक्षा तथा औद्योगिक विस्तार के बीच संबंधों के प्रभाव का परीक्षण कीजिए।


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