UPSC Philosophy Optional Question Paper 2025 (दर्शनशास्त्र प्रश्न पत्र)

UPSC Philosophy Optional Question Paper 2025: प्रश्न पत्र I

खण्ड- A

निम्नलिखित प्रत्येक प्रश्न का उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिये :

1.(a) “प्रत्यय कालातीत तथा देशातीत हैं ।” प्लेटो के संदर्भ में इस कथन पर प्रकाश डालिए ।
1.(b) “ आनुभविक संसार में प्रत्येक वस्तु द्रव्य तथा आकार का संयुक्त रूप होती है ।” अरस्तू के संदर्भ में इस कथन का मूल्यांकन कीजिए ।
1.(c) सार्त्र द्वारा प्रस्तुत स्व- हेतु – अस्तित्व (बींग – फॉर – इटसैल्फ) तथा स्व-स्थित- अस्तित्व (बींग-इन- इटसैल्फ) के बीच अन्तर की व्याख्या कीजिए ।
1. (d) “सोने से निर्मित पर्वत बहुत ऊँचा है।” इस वाक्य की रसैल के वर्णन के सिद्धान्त (थियोरी ऑफ डिस्क्रिप्शन्स) के सन्दर्भ में विवेचना कीजिए ।
1.(e) कांट द्वारा प्रदत्त घटना – संवृति (फेनोमेना) तथा परमार्थसत् (नोमेना) के बीच विभेद को हेगल किस प्रकार चुनौती देते हैं ? विवेचना कीजिए ।

2. (a) बुद्धिवाद की मूल मान्यताएं क्या हैं ? देकार्त किस प्रकार उनके आनुरूप्य में एक दर्शन तन्त्र का निर्माण करते हैं ? विवेचना कीजिये ।
2. (b) ” सभी परिच्छेदन / गुण निषेधात्मक है ।” स्पिनोजा के संदर्भ में टिप्पणी कीजिए ।
2.(c) कारणता संबंध का ह्यूम द्वारा खण्डन तथा उस पर कांट के प्रत्युत्तर का परीक्षण कीजिए ।

3. (a) “हमें एक ऐसी आदर्श भाषा जो अपना अर्थ तथ्यों से प्राप्त करती हो तथा जिसका सुनिश्चित तार्किक आकार हो, की ओर नहीं देखना चाहिए वरन् हमें अनुभववादी परिपेक्ष्य से उन तरीकों को देखना चाहिए जिनसे भाषा वास्तविक रूप से प्रयोग में लायी जाती है।” इस कथन के संदर्भ में विटगेन्स्टाईन के पूर्ववर्त्ती विचारों से उनके उत्तरवर्ती विचारों की ओर पारगमन की व्याख्या कीजिए ।
3.(b) तार्किक भाववादियों द्वारा प्रतिपादित अर्थ के सत्यापन सिद्धान्त का विवरण प्रस्तुत कीजिए । इस संदर्भ में “सत्यापनीय” (वेरिफाइबल) शब्द के “सुदृढ़ ” तथा “दुर्बल / क्षीण” अर्थ को भी विभेदित कीजिए ।
3.(c) “नीला संवेदना की एक वस्तु है तथा हरा दूसरी, तथा चेतना जो दोनो संवेदनाओं में विद्यमान है, उन दोनों से भिन्न है ।” इस कथन के संदर्भ में मूर द्वारा प्रत्ययवाद के खण्डन का विवरण प्रस्तुत कीजिए ।

4. (a) “मैं सोचता हूँ” इस विषय पर हुस्सर्ल की व्याख्या देकार्त की व्याख्या से किस प्रकार भिन्न है ? समालोचनात्मक विवेचन कीजिए ।
4. (b) “चाहे अनुभव की अवस्था किसी भी प्रकार की हो, हमारे परिपूर्ण तन्त्र में हम किसी भी वाक्य के सत्य को प्रतिज्ञापित कर सकते हैं, जब तक कि हम अन्यत्र समायोजन / सामंजस्य करने के लिए तैयार हों ।” इस वाक्य की क्वाईन के ‘टू डोग्मास ऑफ एम्पीरिसिज्म’ के प्रकाश में विवेचन कीजिए ।
4. (c) बर्कले के नाममात्रवाद के सिद्धान्त तथा उनके द्वारा अमूर्त प्रत्ययों के खण्डन की व्याख्या कीजिए ।

खण्ड ‘B’

5. निम्नलिखित प्रत्येक प्रश्न का लगभग 150 शब्दों में उत्तर दीजिए :

5. (a) उन आधारों की व्याख्या कीजिए जिनके बल पर चार्वाक ज्ञान के वैध स्रोत के रूप में अनुमान का निषेध करता है ।
5. (b) नैयायिकों एवं बौद्धों के मध्य प्रमाण एवं प्रमाणफल सम्बन्धी संवाद का विवरण प्रस्तुत कीजिये ।
5.(c) शास्त्रीय भारतीय दर्शन में स्वतः प्रामाण्यवाद तथा परतः प्रामाण्यवाद के सिद्धांतों के मध्य विभेद के प्रमुख बिन्दुओं को रेखांकित कीजिए ।
5. (d) अद्वैत के मायावाद के विरुद्ध रामानुज की सप्तानुपपत्तियों की परीक्षा कीजिये ।
5.(e) न्याय-वैशेषिकों के कारणता के सिद्धान्त की व्याख्या प्रस्तुत कीजिए ।

6. (a) गौतम की प्रत्यक्ष की परिभाषा का विस्तृत विवरण प्रस्तुत कीजिए ।
6. (b) अद्वैत दर्शन में किस प्रकार जगत के निमित्तोपादान कारण के रूप में ब्रह्म की अवधारणा की गयी है, उपयुक्त उदाहरण के साथ विवेचन कीजिये |
6. (c) ‘अभाव’ के स्वरूप एवं इसके ज्ञान के सन्दर्भ में भट्ट एवं प्रभाकर मीमांसकों के बीच संवाद का विवेचन कीजिये ।

7.(a) शंकर सांख्य दर्शन को अपना प्रधान मल्ल क्यों मानते हैं ? सांख्य दर्शन के विरुद्ध उनके तर्कों का परीक्षण कीजिये ।
7. (b) योग दर्शन में ईश्वर के स्वरूप एवं कैवल्य में इसकी भूमिका की व्याख्या कीजिये ।
7.(c) क्या जैन दर्शन बहुतत्त्ववादी एवं यथार्थवादी है ? आलोचनात्मक विवेचना कीजिये ।

8. (a) वेदांत दर्शन में प्रस्तुत बिम्ब – प्रतिबिम्बवाद की अवधारणा की उसके मोक्षशास्त्रीय महत्त्व सहित विवेचना कीजिए ।
8. (b) ‘सन्यासी एवं जड़वादी दोनों परस्पर निषेध में एकाङ्गी हैं।’ इस कथन के आलोक में श्री अरविन्द के समग्र दर्शन की व्याख्या कीजिये ।
8. (c) क्या बौद्धों की निर्वाण की अवधारणा उनके क्षणिकवाद एवं नैरात्म्यवाद की अवधारणा के साथ संगत है ? समालोचनात्मक विवेचना कीजिए ।


UPSC Philosophy Optional Question Paper 2025: प्रश्न पत्र II

खण्ड- A

Q1. निम्नलिखित में से प्रत्येक प्रश्न का उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए:

(a) “भ्रष्ट आचरण विशेष तथा सार्वभौमिक नियामक आदर्शमूलक मानकों के बीच एक अंतस्थित विरोध को उजागर करता है ।” क्या आप इस कथन से सहमत हैं ? अपने उत्तर के लिए तर्क तथा प्रमाण कीजिए ।
(b) सामाजिक निर्मिति के रूप में लिंग ( जेन्डर) व्यक्तियों के अवसरों, अधिकारों, तथा संसाधनों तक उनकी पहुँच को किस प्रकार प्रभावित करता है ? समालोचनात्मक विवेचना कीजिए ।
(c) क्या धर्मनिरपेक्षता की अवधारणा अनिवार्य रूप से धार्मिक बहुलवाद की अवधारणा से जुड़ी हुई है ? विवेचना कीजिए ।
(d) प्लेटो की प्रजातंत्र की समीक्षा पर टिप्पणी कीजिए ।
(e) जे.एस. मिल के अनुसार समानता की मुख्य विशेषताओं का विवेचन कीजिए ।

Q2. (a) जातिगत भेदभाव के विषय पर गाँधी तथा अम्बेडकर के बीच बहस का विस्तृत विवरण प्रस्तुत कीजिए ।
(b) राजनीतिक विचारधारा के रूप में मार्क्सवाद का मूल्यांकन कीजिए ।
(c) कौटिल्य के संप्रभुता के सिद्धान्त के आलोक में इस कथन की विवेचना कीजिए कि ‘कोई भी स्थायी मित्र अथवा स्थायी शत्रु नहीं होता है।”

Q3. (a) क्या किसी के जीवन का अधिकार निरपेक्ष हो सकता है ? मृत्युदण्ड की अवधारणा के संदर्भ में उत्तर दीजिए।
(b) टैगोर के मानववाद में विरोधों का समन्वय कैसे होता है ? मूल्यांकन कीजिए ।
(c) क्या सामाजिक तथा आर्थिक प्रगति लाने के लिए विकास की अवधारणा का जनजातीय मूल्यों के साथ समन्वय करना सम्भव है ? विवेचन कीजिए ।

Q4. (a) सामाजिक एवं राजनीतिक आदर्शों के रूप में कैसे समानता और स्वतंत्रता दोनों न्याय के अभाव में अपर्याप्त हैं ? विवेचन कीजिए ।
(b) क्या शासन के वैध रूप में धर्मतन्त्र को स्वीकार किया जा सकता है ? अपने उत्तर के पक्ष में तर्क तथा प्रमाण प्रस्तुत कीजिए ।
(c) “कर्तव्य दायित्व के स्वरूप के होते हैं जबकि अधिकार पात्रता के स्वरूप के होते हैं । अतएव इन दोनों के बीच कोई अनिवार्य सम्बन्ध नहीं होता ।” क्या आप इस कथन से सहमत हैं ? अपने उत्तर के पक्ष में तर्क तथा प्रमाण प्रस्तुत कीजिए ।

खण्ड B

Q5. निम्नलिखित में से प्रत्येक प्रश्न का उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए :

(a) अतीन्द्रिय सत्ताओं के अस्तित्व में विश्वास के विषय में चार्वाक की समीक्षा का विवेचन कीजिए ।
(b) क्या धार्मिक भाषा प्रतीकात्मक है ? अपने उत्तर के पक्ष में तर्क तथा प्रमाण प्रस्तुत कीजिए ।
(c) नीत्शे की धर्म तथा नैतिकता की आलोचना का विवरण प्रस्तुत कीजिए ।
(d) अद्वैत वेदान्त के सन्दर्भ में जीवन्मुक्ति के स्वरूप का विवेचन कीजिए ।
(e) “एक बुद्धिगत स्वीकृति” के रूप में एक्विनास द्वारा प्रदत्त आस्था का विवरण किस प्रकार तर्कबुद्ध तथा आस्था के बीच विरोधाभास को समन्वित करता है ? विवेचना कीजिए ।

Q6. (a) ईश्वर की सत्ता सिद्ध करने के लिए रचनामूलक (डिज़ाइन ) युक्ति का डेविड ह्यूम द्वारा उसकी आलोचना सहित विवरण प्रस्तुत कीजिए ।
(b) अशुभ की समस्या की एक व्याख्या के रूप में सतत् प्रक्रियागत थियोडिसी के मुख्य सिद्धान्तों की व्याख्या कीजिए ।
(c) इलहाम के प्रतिज्ञप्त्यात्मक (प्रोपोजिशनल) मत के संदर्भ में प्राकृतिक धर्म – विज्ञान एवं रहस्योद्घाटित धर्म-विज्ञान के मध्य भेद स्पष्ट कीजिए ।

Q7. (a) धार्मिक बहुलवाद का वेदान्ती मत विभिन्न आस्थाओं के संघर्षरत सत्य दावों को किस प्रकार सम्बोधित करता है ? स्वामी विवेकानन्द के सार्वभौम धर्म के मत के संदर्भ में उत्तर दीजिए ।
(b) न्याय दार्शनिक ईश्वर की सत्ता के लिए क्या प्रमाण प्रस्तुत करते हैं ? विवेचन कीजिए ।
(c) क्या आत्मा की अमरता की अवधारणा पुनर्जन्म के लिए एक आवश्यक शर्त है ? भगवद्गीता सन्दर्भ में विवेचन कीजिए ।

Q8. (a) ‘दी हिन्दू व्यू ऑफ़ लाइफ़’ में राधाकृष्णन द्वारा व्याख्यायित धार्मिक अनुभूति के स्वरूप और विषय का मूल्यांकन कीजिए।
(b) क्या किसी नैतिक अभिकर्ता में कर्तव्यबोध जगाने के लिए नियामक आदर्शमूलक (नॉर्मेटिव) तत्त्वों के लिए ईश्वर को सन्दर्भित करना अनिवार्य है ? समालोचनात्मक विवेचना कीजिए ।
(c) धार्मिक भाषा के स्वरूप के संदर्भ में अनिर्वचनीयता की अद्वैतिक अवधारणा की विवेचना कीजिए ।


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